वास्तु है सबके लिए (भाग 11) मुख्य शयनकक्ष ( master bedroom) की स्थिति

27Oct
वास्तु है सबके लिए (भाग 11)
*शयनकक्ष कहां हो*
भारतीय वास्तु शास्त्र में यद्यपि सभी दिशाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है सभी दिशाएं मानव जीवन को प्रभावित करती हैं घर की माप और घर का कोना तथा घर में रखा हुआ सामान, ये सभी मानव जीवन पर प्रभाव डालते हैं। क्योंकि महाभारत में एक सूक्ति आती हैं, यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे।
पृथ्वी पंचतत्वों  से बनी है। हमारे घर का वातावरण को भी पंचतत्व प्रभावित करते हैं और हमारा शरीर भी तो पंच तत्वों से बना है। यदि हमारा घर पंचतत्व के अनुकूल होगा तो हमारा शरीर भी स्वस्थ रहेगा और नित्य प्रति धन धान्य, समृद्धि ,लक्ष्मी का निवास होगा। इसीलिए हर वस्तु के लिए कोई न कोई दिशा वास्तु नियमों में बंधी है। शयन कक्ष घर में वह महत्वपूर्ण स्थान है, जहां पर मनुष्य जीवन का लगभग एक तिहाई हिस्सा उसमें बिताता है। क्योंकि हर दिन कम से कम 6 से 8 घंटे उसमें सोता ही है इसीलिए सबसे ज्यादा प्रभाव व्यक्ति पर उसके शयनकक्ष का पड़ता है।
             सबसे पहले हम मास्टर बैडरूम अर्थात गृह स्वामी का सोने का कक्ष व  उसके वास्तु पर चर्चा करते हैं। गृह स्वामी का कमरा घर की दक्षिण पश्चिम दिशा  में होना चाहिए क्योंकि यह दिशा स्थायित्व की है ।यदि गृह  स्वामी इस कक्ष में रहेगा ,उसमें सोएगा, तो वह स्वस्थ रहेगा उसका प्रभाव पूरे परिवार पर रहेगा। सब लोग उनकी आज्ञा का पालन करेंगे।
शयन कक्ष में ध्यान रखें की पलंग या बेड का सिराहना सदैव पूर्व या दक्षिण में हो ।ऐसा करने से और उस दिशा में सिर रखकर सोने से नींद अच्छी आती है, सपने कम आते हैं और नई ऊर्जा का संचार होता है ।कहीं-कहीं ऐसा देखा जाता है जगह की कमी से दक्षिण और पूर्व में सिराहना  रख पाना असंभव रहता है कुछ लोग पंलग का  सिराहना तो दक्षिण व पूर्व  में नही रख पाते हैं किंतु सोते हैं दक्षिण में सिर करके। यहां एक बात ध्यान देने की है कि सोते समय हमारा सिराहना भारी होना चाहिए ।पीछे दीवार या पलंग का ऊंचा बैकग्राउंड होना चाहिए। इससे हमको नींद अच्छी आती है। हम यदि दक्षिण में सिर करके सो रहे हैं,  उस तरफ खाली स्थान है या निकलने का स्थान है तो वह हमारी नींद को बाधित कर सकता है। यह विचार हमें भवन निर्माण के समय ही करना चाहिए और यदि आपके घर में आपका घर वास्तु के उपरोक्त नियमों के अनुकूल है आप सबसे भाग्यशाली व्यक्ति हैं।
मुख्य शयन कक्ष मैं पानी की कोई सीनरी नहीं होनी चाहिए, हिंसक पशुओं के चित्र अथवा दृश्य नहीं होनी चाहिए  ।यदि हमारे शयन कक्ष में पानी का चित्र होगा सीनरी होगी तो हमारे गृहस्थ जीवन को प्रभावित करेगी ।हिंसक पशुओं के चित्र या युद्ध के दृश्यों के चित्र हमारे मन में उग्र भावना भर सकते हैं।  आपस में इगो उत्पन्न हो सकता है। इस कक्ष का रंग हल्का  लाल या आसमानी होना चाहिए। इस कक्ष में आंखों को सुहाते रंग की लाइट (जीरो वाट का बल्ब) हमेशा जलती रहे ।
शाम के समय आप मोमबत्ती जला सकते हैं।
शयन कक्ष के पूर्वी भाग में 2 पक्षियों का जोड़ा या हंसों का जोड़ा रखना संबंधों को मजबूत रखता है ।ध्यान रखें शयन कक्ष में ड्रेसिंग टेबल अथवा सीसा नहीं होना चाहिए इससे भी पति-पत्नी के आपसी संबंधों पर प्रतिकूल असर होता है यह भी ध्यान रहे हमारा शयन कक्ष हमारा सबसे महत्वपूर्ण स्थान है इस कक्ष में कभी भी मदिरापान ना करें  ।कभी भी शयन कक्ष में बिस्तर पर बैठ कर भोजन न करें स्वास्थ्य  पर बुरा असर पड़ता है। शयन कक्ष में धीमी गति का मधुर संगीत कुछ देर बजाने से कक्ष ऊर्जावान हो जाता है। घर के छोटे सदस्यों जैसे छोटा भाई,बड़े बेटे का कक्ष क्रमशः दक्षिण, पूर्व या पश्चिम में बनाए जा सकते हैं किंतु सभी कक्ष में मुख्य  शयन कक्ष की भांति सभी व्यवस्थाएं होनी चाहिए ।
पंडित शिवकुमार शर्मा, आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न 
अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद 9811893069
Pt.Shiv Kumar Sharma

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