वास्तु है सबके लिए( भाग 19) सिंह मुखी व गऊ मुखी भवनों का वास्तु विश्लेषण
प्राचीन काल से ही भवनों के बारे में अवधारणा बनी हुई है कि शेर मुखी या गऊ मुखी भवनों का मानव जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है । वर्तमान समय के अनुसार भी यह अवधारणा ठीक है किन्तु भ्रम की स्थिति बनी रहती है ।इस भ्रम के निवारण हेतु मैं यह आलेख लिख रहा हूं।
वास्तु शास्त्र में गऊ मुखी तथा सिंह मुखी भवनों भूखण्डों का विस्तृत उल्लेख है।
सबसे पहले इन दोनों प्रकार के भूखण्डों का विश्लेषण करेंगे।
कुछ लोग प्लॉट की बढ़ी हुई या कटी हुई दिशा को भी सिंहमुखी अथवा गऊमुखी मान लेते हैं। जबकि यह सत्य नहीं है ।सिंह मुखी प्लाट या भवन वह होता है जिसका फ्रंट (आगे का हिस्सा) दोनों ओर से समान रूप से सूप(छाज) के आकार में हो ।गऊ मुखी भवन या प्लाट वह होता है जिसकी दोनों ओर की भुजाएं समान रूप से कम होती जाती हैं।
सिंह मुखी भवनों का विवरण
सिंह मुखी भवन का प्रयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए बहुत शुभ होता है । सिंहमुखी दुकान ,फैक्ट्री ,कार्यालय आदि शुभ माने गए हैं। ऐसा माना जाता है कि जैसे-जैसे दोनों ओर दुकान अथवा फैक्ट्री की दीवारों की वृद्धि होती है, उसी प्रकार दुकान के व्यवसाय और फैक्ट्री में निरंतर वृद्धि के संकेत होते हैं।
सिंह मुखी भूखंड पर आवासीय भवन या फ्लैट नहीं बनानी चाहिए।
सिंहमुखी दुकान आदि में हमेशा काउंटर दक्षिण अथवा पश्चिम में बहुत अच्छा होता है ।ताकि बैठने वाले का मुंह उत्तर या पूरब में होना चाहिए। यदि दक्षिण पश्चिम दिशा में दुकान का काउंटर अथवा फैक्ट्री का स्वागत कक्ष ने बन सके उत्तर या पूर्व में भी बना सकते हैं।
गऊमुखी भवनों का विवरण
गऊमुखी वे भवन अथवा भूखंड होते हैं जिनका फ्रंट अथवा प्रवेश दिशा दोनों भुजाओं की ओर से छोटी होती है ऐसे भवन आवास के लिए बहुत शुभ होते हैं। कहा जाता हैं कि ऐसे भवनों में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहती है।
गोमुखी होने में गृह स्वामी सदैव प्रसन्न दिखाई पड़ते हैं। उनकी हर क्षेत्र में उन्नति होती है यदि आपका घर इस प्रकार का है तो आप बहुत भाग्यशाली है।
कुछ लोग दिशा वृद्धि या कटी हुई दिशा को भी सिंह मुखी या गोमुखी मान लेते हैं। जबकि ऐसा नहीं है दिशा वृद्धि में केवल उत्तर पूरब का कोना बढ़ा हुआ ही श्रेष्ठ होता है ।यदि भवन या भूखण्ड का उत्तर पूर्व का कोण समकोण या अधिक कोण में होता है तो वह घर धन समृद्धि के लिए बहुत शुभ होता है ऐसा भवन फैक्ट्री, ऑफिस, दुकान बहुत शुभ होते हैं।लक्ष्मी का वास वहां हमेशा रहता है, उस घर की संताने विशेषकर पुत्र संतान बहुत उन्नति करती हैं।
उत्तर पूर्व दिशा छोटी है या न्यून कोण है ऐसे भवनों में धन का अभाव बना रहता है। संतान से संतुष्ट नहीं मिलती है।
यदि दक्षिण पूर्व दिशा बढी हुई होती है, वहां पर चोरी अथवा आगजनी की घटनाएं समय-समय पर होने की संभावना रहती है। यदि यह कोना छोटा हो तो महिला सदस्यों के लिए स्वास्थ्य हानि का संकेत करता है।
दक्षिण पश्चिम का कोना बढ़ा हुआ कोना गृहस्वामी के लिए कष्टकारी होता है। चोट ,दुर्घटनाएं अथवा लंबी बीमारी का कारक हो सकता है। यदि यह कोना छोटा या कटा हुआ होता है तो उसमें गृहस्वामी का परिवार में सम्मान कम होता है ,घर में कलेश का वातावरण रहता है ।
उत्तर पश्चिम कोना बढा हुआ होता है तो उसका गृह स्वामी घर से अधिकतर बाहर रहता है, घर में अनचाही घटनाएं बहुत होती है। यह कोना कटा हुआ या छोटा होता है तो उस घर में मेहमानों का जमावड़ा लगा रहता है अर्थात आवभगत पर बहुत खर्च होता है।
पं शिवकुमार शर्मा,आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केन्द्र गाजियाबाद
बहुत सुन्दर जानकारी
Uttam gyan