वास्तु है सबके लिए भाग 20
वास्तु पुरुष के 32 पदों के अनुसार शुभता प्रदान करने वाले द्वारों का विवरण
यह लेख अन्य वास्तु लेखों से बहुत ही महत्वपूर्ण है ।द्वारों के निर्धारण से ही हम अपना घर का वास्तु ठीक कर सकते हैं। वाराहमिहिर के वास्तु ग्रंथ के अनुसार भूखंड के मध्य से गणना करने पर जीरो डिग्री से 360 डिग्री तक पूरे भूखंड का विस्तार होता है। भवन में मुख्य द्वार सबसे प्रधान होता है। यदि घर का मुख्य द्वार है सही स्थान पर या वास्तु पुरुष के 32 पदों में से सही पदों में नहीं है तो घर हमेशा नकारात्मक ऊर्जा देगा।
अब मैं इसको विस्तार से बताऊंगा
वाराह मिहिर के अनुसार पूरे भूखंड को 360 डिग्री के अंदर 32 भाग करते हैं ।360 अंशों को 32 से भाग करेंगे तो 11.25 अंशों का एक पद होता है। यही एक पद का विस्तार है।
अब मैं दिशा के अनुसार पदों का वर्णन करूंगा।
उत्तर दिशा में पदों का विवरण
पहला पहला नॉर्थवेस्ट की ओर से आरंभ होता है।
पहला पद –एन1-रोग
दूसरा पद –एन 2-नाग
तीसरा पद–एन 3- मुख्य-
चौथा पद- एन 4-भल्लाट
पांचवा पद-एन 5- कुबेर
छठा पद- एन 6-मृग
सातवां पद- एन 7- अदिति
आठवां पद-एन8-दिति
उत्तर दिशा के 8 पदों में N3 ,N4, N5 और N8 यह 4 पद द्वार बनाने के लिए बहुत उत्तम है।
पूर्व दिशा में पदों का निर्धारण
पहला पद- इ 1-ईश
दूसरा भाग- इ 2-पर्जन्य
तीसरा पद– इ3-जयन्त
चौथा पद- इ 4-इन्द्र
पांचवा पद- इ 5- सूर्य
छठा पद- इ 6- सत्य
सातवां पद-इ 7-भ्रंश
आठवां पद इ8-आकाश
पूर्व दिशा के इन आठों पदों में दो पद तीसरा व चौथा पद ही मुख्य द्वार के लिए शुभ माने गए हैं। पहला इ 3 जयंत और दूसरा इ 4 इंद्र। वास्तु पुरुष के इन पदों में द्वार बनाने से घर की वृद्धि, संतान की वृद्धि निरंतर होती है।
दक्षिण दिशा में पदों का निर्धारण
पहला पद -s1 -अग्नि
दूसरा पद- s2 -पूषन्
तीसरा पद- s3- वितथ
चौथा पद- s4- गृहक्षत्
पांचवा पद -s5 -यम
छठा पद- s6- गंधर्व
सातवां पद- s7- भृंगराज
आठवां पद- s8-मृषा
दक्षिण दिशा के 8 पदों में केवल दो पद ही s3 वितथ व s4
गृहक्षत् ही मुख्य द्वार के लिए शुभ माने गए हैं यहां पर द्वार होने से घर में निरंतर वृद्धि होती है।
पश्चिम दिशा में पदों का निर्धारण
पहला पद -w1- नैऋत्य
दूसरा पद-w2- द्वारिका
तीसरा पद- w3-सुग्रीव
चौथा पद -w4- पुष्यदन्त
पांचवा पद-w5 -वरुण
छठा पद- w6 – असुर
सातवां पद- w7-शेष
आठवां पद-w8-पापयक्ष्मा
पश्चिम के इन 8 पदों में मुख्य रूप से 4 पद w3 सुग्रीव ,w4 पुष्यदन्त ,w5 वरुण, इन्हें शुभ माना गया है इन्हीं पदों पर मुख्य द्वार बनाने से घर में हमेशा आनंद की वर्षा होगी।
अपने भवन में वास्तु पद को निकालने का सरल तरीका यह है कि प्लॉट की लंबाई और चौड़ाई की आठ बराबर भाग कीजिए।
ब्रह्म स्थान में कंपास के माध्यम से उनकी 11.5 डिग्री का निर्धारण कर लीजिए वह 11.5 डिग्री के स्थान को एक पद कहेंगे।
उदाहरण स्वरूप किसी प्लॉट का सामने वाला भाग चौड़ाई 24 फीट है। 24 को 8 से भाग करने पर तीन फुट आता है। यही 3 फुट का स्थान प्रत्येक पद का स्थान होगा। इसी प्रकार से अलग-अलग पदों का निर्धारण कर लीजिए और जो जो शुभ पद हैं उन पर अपने घर के द्वार का स्थान रखिए। यह सर्वोत्तम वास्तु है। यहां पर मैं एक उदाहरण दूंगा, हमारे महानगर के सबसे बड़े उद्योगपति एसोमैक मशीन्स के चेयरमैन श्री राजकुमार त्यागी जी की कंपनी जब आरंभ हुई अच्छी प्रकार से चल रही थी ।उन्होंने किसी कारणवश वायव्य कोण में एन 1 रोग पद पर एक द्वार बना दिया। इस द्वार के बनते ही कंपनी घाटे में चलनी शुरू हो गई । त्यागी जी बताते हैं कि प्रसिद्ध ज्योतिषी पं . विनायक पुलह से परामर्श किया। उन्होंने वाराह्मीहिर के इन पदों के आधार पर सुग्रीव पद पर द्वार खोलने का परामर्श दिया।द्वार सुग्रीव पद पर खोला गया। उस द्वार को बंद कर दिया गया। उसके बाद जो उन्नति देश विदेश में
इसोमैक मशीन कंपनी में की है,कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा ।वह कंपनी अपनी गुणवत्ता में देश विदेश में दिन दुगनी रात चौगुनी उन्नति कर रही है ।विश्व का कोई ऐसा देश होगा जहां पर एसोमैक कंपनी की पहुंच न हो।
श्री राजकुमार त्यागी जी स्वयं एक वास्तु विशेषज्ञ हैं। किंतु विद्वानों के साथ बैठना, उनसे परामर्श करना उनके सरल स्वभाव को दिखाता है ।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद
No Comments yet!