वास्तु है सबके लिए (भाग 27) भवन में पेंटिंग( रंग रोगन) कैसा हो

27Oct
वास्तु है सबके लिए (भाग 27)
*भवन के दीवारों की पेंटिंग(रंग रोगन) कैसा हो*
वास्तु शास्त्र हमारे आवास , कार्यालय ,फैक्ट्री और किसी भी निर्माण का संपूर्ण विवेचन है। जमीन खरीदने से लेकर और मकान बनाने तक और उसमें रहने के लिए निश्चित कक्षों की व्यवस्था तक वास्तु का उपयोग होता है ।
अपने भवन या ऑफिस में इस प्रकार के रंग या पेंटिंग करें जिससे कि वह हमारा भवन परस्पर प्रेम और उन्नति के अनुकूल हो।
*ड्राइंग रूम में रंग संयोजन*
जैसा कि मैंने पहले बताया था कि अपने घर का बैठक कक्ष अर्थात ड्राइंग रूम हमारे घर का मुख्य दर्पण है। घर में आने  वाले  व्यक्ति सबसे पहले इसी कक्ष में आते हैं। इसलिए इस कक्ष के दीवारों का रंग आकर्षक होना चाहिए। वैसे तो दिशाओं के अनुसार रंग रोगन की व्यवस्था अलग है। किंतु सामान्य रूप से आंखों को सुंदर लगने वाले रंग सफेद, क्रीम कलर, हल्का गुलाबी हल्का नीला कलर ड्राइंग रूम के लिए अच्छे होते हैं ।छत पर भी उन्हें रंगो के समायोजन करते हुए पेंटिंग करानी चाहिए।
*बैडरूम में रंगों का संयोजन*
बैडरूम अर्थात शयन कक्ष ऐसा स्थान है जहां हम दिन भर की थकान मिटाते हैं ।कम से कम 6 से 8 घंटे तक हमारा वहां पर निवास रहता है। बैडरूम में  मन को प्रसन्न करने वाले रंग का चयन करना चाहिए ।गुलाबी, हल्का लाल, हरा, हल्का हरा , सफेद और  हल्का नीला  रंग बेडरूम के लिए शुभ होता है किंतु एक बात विशेष ध्यान रखें,यदि आपके जीवनसाथी या आपके स्वभाव में क्रोध की भावना है तो लाल रंग का त्याग कर दें। बेडरूम में यदि हम शांतिपूर्वक नहीं सो सके तो तो हमारा पूरा दिन खराब हो जाएगा। इसलिए सब चिंताओं को छोड़कर बेडरूम में प्रवेश करना चाहिए। बेडरूम में कभी भी पानी की सीनरी, व शीशा रखना भी  अच्छा नहीं होता।
*रसोई घर का रंग संयोजन*
हमारा भवन सब प्रकार से व्यवस्थित है ,किन्तु रसोई पर ध्यान नहीं दिया तो हमारा स्वास्थ्य बहुत प्रभावित होगा। इसीलिए रसोई में सदैव हल्के रंगों का प्रयोग करें। रसोई का दीवारों का रंग सफेद अच्छा माना गया है ।क्रीम कलर, पिंक और हल्का लाल रंग की पेंटिंग  करा सकते हैं। लेकिन एक बात ध्यान रखें की रसोई की स्लैप पर हरा या लाल पत्थर ना लगाएं। हरा या लाल पत्थर लगाने से
गृहिणी या भोजन बनाने वाला व्यक्ति बार-बार पैरों में दर्द व बेचैनी का अनुभव कर सकता है ।रसोई घर में हमेशा सफेद पत्थर ही लगवाएं। कुछ लोग कहते हैं कि सफेद पत्थर जल्दी गन्दा हो जाता है। जल्दी गंदा होने का अर्थ क्या होता है ?लाल व  हर पत्थर पर गंदगी कम दिखाई देती है और रसोई में कहीं ना कहीं अस्वच्छता रह जाती है। इसलिए सफेद पत्थर पर ही हमें भोजन बनाना चाहिए। इससे गन्दगी तुरंत दिखाई देगी और हम उसको साफ कर सकते हैं।
*बच्चों के कमरे के रंग संयोजन*
बच्चों के कमरे में हमेशा हल्के रंग रखने चाहिए ।क्योंकि प्राय: अध्ययन कक्ष या बच्चों का कमरा उत्तर पूर्व में होता है ।इस दिशा में मन को सुकून देने वाला रंग हल्का हरा ,हल्कानीला, सफेद या क्रीम कलर बहुत शुभ रहता है।
*अतिथि कक्ष का रंग संयोजन*
अतिथि कक्ष वह स्थान होता है जहां आपकी अतिथि खुशी में ठहरते हैं। ऐसे कमरे का रंग मन को प्रसन्न लगने वाला और खुशी देने वाला होना चाहिए ।क्योंकि अधिकतर यह कमरा उत्तर पश्चिमी दिशा में बनाया जाता है ।इसलिए दिशा में हरा रंग, हल्का हरा रंग क्रीम कलर बहुत शुभ रहते हैं।
*बाहरी दीवारों का रंग संयोजन*
घर में प्रवेश करने से पहले हमारे घर का मुख्य द्वार  आकर्षक होना चाहिए ।मुख्य द्वार पर भड़कीले व चटकीले रंग नहीं कराने चाहिए। सामान्यता हल्के रंग जो अच्छे लगे और मन को प्रसन्न रखें ।सफेद रंग, हल्का हरा, पीला ,पर्पल आदि रंगों से घर का बाहरी आवरण सजाना चाहिए ।
घर की दीवारें बोल उठे, ऐसा हम सोचते हैं किन्तु  जब तक घर के लोग खुश नहीं हैं दीवारें बोलने का क्या फायदा? परस्पर वार्तालाप, सहयोग ,सद्भाव, प्रेम बना रहे यही अच्छी वस्तु का उपयोग है।
एक बात और ,आजकल हर कक्ष में एक दीवार पर डिजाइन बनाने का फैशन चल रहा है कुछ तो वाॅल पेपर  व  लकड़ी से भी सज्जा कराने  लगे हैं। ऐसे में इन बातों का विशेष ध्यान रखें कि किस कक्ष में कौन सा रंग प्रयोग करना है ,वैसी ही लकड़ी  या वाॉल पेपर का प्रयोग दीवार पर  कराना चाहिए। मैंने कई  स्थानों पर देखा है  कि दीवारों पर लकड़ी का प्रयोग शुभ नहीं होता है।गृह स्वामी को मानसिक परेशानी घेरने लगती हैं।
कुछ लोग घरों में रंग बिरंगी डिजाइनिंग वाली टाइल्स भी लगवाने  लगें हैं। पूरे घर में या मुख्य द्वार पर पूर्ण रूप से टायल लगाना घर की सांसो को बंद करना होता है। ऐसा कहा जाता है कि दीवारें भी सांस लेती हैं और जिस घर में दीवारें सांस नहीं लेती हैं वहां पर व्यक्तियों की स्वास्थ्य हानि निश्चित है। यदि हम दीवार पर प्लास्टिक पेंटिंग या टाइल्स लगवाते हैं तो दीवारे  बंद हो जाती हैं। आपने देखा होगा एसी रूम में जब तक हम  रहते है हमें ठंडी हवा तो आती है। किंतु धीरे-धीरे हमारा स्वास्थ्य दिक्कत करने लगता है इसलिए स्वस्थ रहने के लिए दीवारों का भी सांस लेना आवश्यक है ।क्योंकि पहले पी ओ पी कराएंगे उसके बाद प्लास्टिक पेंटिंग करएंगे ।इससे दीवार का सांस लेने  काक्रम रुक जाता है। हां यदि दीवार में सीलन है, तो उस क्षेत्र में टाइल लगा सकते हैं।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न 
अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र, गाजियाबाद
Pt. Shiv Kuamr Sharma

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