वास्तु है सबके लिए भाग (44) * *नींव रखने में शेषनाग विचार*

27Oct

 वास्तु है सबके लिए भाग (44)

* *नींव रखने में शेषनाग विचार*

वास्तु शास्त्र और ज्योतिष की अवधारणा एक दूसरे की पूरक है। दोनों ही शास्त्र मानव कल्याण के लिए बनाए गए हैं। व्यक्ति के जन्म से लेकर उसके रहन -सहन ,निवास स्थान आदि में ज्योतिष तथा वास्तु का समान रूप से वितरण है।

 यदि हम वास्तु शास्त्र को दिशाओं का ज्ञान मानते हैं तो ज्योतिष उस दिशा को अच्छी बुरी दशा में बदलने में सहायक है। अंतर है बस विवेकपूर्ण अध्ययन का।दोनों का सामंजस्य हम किस प्रकार कर पाते हैं। उसी का हमारे  मकान के प्रारंभिक चरण नींव पूजन में  महत्व है ।

किस दिशा में हमें नींव रखनी चाहिए? जिससे कि हमारा घर बुरी दशाओं से सुरक्षित रहे । ज्योतिष में 12 सक्रांति होती हैं। एक महीना सूर्य एक सक्रांति पर विचरण करते हैं ।उसी के आधार पर नींव रखने के उपक्रम में सक्रांति का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। सक्रांति के अनुसार ही शेषनाग (राहु) का मुख और पुच्छ का निर्धारण होता है।

जो इस प्रकार से है ।

1.सिंह, कन्या और तुला सक्रांति में जब सूर्य देव विचरण करते हैं अर्थात  लगभग15 अगस्त से 15 नवंबर  तक शेषनाग का मुख ईशान दिशा में होता है और पुच्छ आग्नेय दिशा में  रहती है। इसीलिए इस समय में नींव रखने की दिशा शेषनाग की पूंछ की ओर अर्थात आग्नेय दिशा में होती है।

2.वृश्चिक, धनु और मकर की सक्रांति में जब सूर्य विचरण करते हैं अर्थात 16 नवंबर से 15 फरवरी तक का समय शेषनाग का मुख वायव्य कोण में होता है और उसकी पूंछ ईशान दिशा में मानी गई है। इसलिए इस अवधि में ईशान दिशा में घर की नींव रखने के लिए भूमि पूजन करना चाहिए।

3.कुंभ, मीन और मेष की संक्रांति में जब सूर्य देव विचरण करते हैं अर्थात 16 फरवरी से 15 मई तक का समय शेषनाग का मुंह नैऋत्य कोण में होता है। और पुच्छ वायव्य कोण में   होती है ।इसलिए इस अवधि में वायव्य कोण में नींव पूजन होना चाहिए।

4.वृष ,मिथुन और कर्क की सक्रांति में सूर्य का विचरण होता है अर्थात 15 मई से 15 अगस्त तक का समय शेषनाग का मुंह आग्नेय दिशा में होता है । उसकी  पूंछ नैऋत्य दिशा में  होती है ।इस अवधि में नैऋत्य कोण में ही होना चाहिए।

उपरोक्त  शास्त्रीय नियमों के अनुसार शेषनाग अर्थात राहु की गति उल्टी/वक्री होती है ‌इसलिए शेषनाग की चाल एंटी क्लॉक वाइज यानी दाहिने हाथ से बाएं हाथ को  होती है। इसी के आधार पर उसकी पूंछ पर ही नींव रखने का विधान माना गया है।

पंडित शिवकुमार शर्मा- आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न 

अध्यक्ष शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र , गाजियाबाद

No Comments yet!

Your Email address will not be published.