वास्तु है सबके लिए (भाग- 7)

27Oct
वास्तु है सबके लिए (भाग 7)
ईशान दिशा का महत्व
ईशान दिशा वास्तु शास्त्र के अनुसार सबसे पवित्र मानी गई है। इस दिशा का विस्तार  22 .5 डिग्री से 67 .5 डिग्री तक होता है यह दिशा उत्तर और पूर्व का कोना होता है। इस दिशा के स्वामी भगवान शिव हैं  । इस दिशा का आधिपत्य बृहस्पति देव के पास है। यह एक आध्यात्मिक दिशा है।
ईशान दिशा में मंदिर का स्थान, स्नान गृह ,बच्चों का कमरा ,स्टडी रूम और बैठक शुभ रहती है। इस दिशा को सबसे स्वच्छ ,खाली और नीचा रखना चाहिए। घर के द्वार खिड़कियां इस और शुभ मानी गई है। यह दिशा घर में पुत्र संतान एवं धन समृद्धि की है यदि यह दिशा दूषित है तो घर में धनधान्य की कमी आएगी। पुत्र संतान से असंतोष मिलेगा। इस दिशा में कभी भी शौचालय, रसोईघर ,जीना, गृह स्वामी कक्ष भूलकर भी ना बनाएं नहीं तो घर का वातावरण खराब हो जाएगा। आपस में कलह ,झगड़े, मनमुटाव होंगें। पुत्र संतान को शारीरिक कष्ट ,बीमारी हो सकती है ।इसलिए वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान को हमेशा खाली रखने का आदेश दिया गया है इस दिशा में  घर का ढलान बहुत शुभ होता है। जिन व्यक्तियों का मूलांक या भाग्यांक तीन होता है ,उसके लिए यह दिशा बहुत शुभ होती है। अर्थात जिनका जन्म किसी भी मास की 3, 12,21 ,30 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 3 होता है ।ऐसे व्यक्तियों को यह दिशा बहुत अनुकूल होती है। ध्यान रखें इस दिशा में कूड़ा, स्टोर, शौचालय आदि न बनवाएं, अन्यथा आपकी प्रतिष्ठा में कमी आ सकती है और संतान सुख का अभाव हो सकता है। मैंने कई वास्तु विजिट करते समय कई स्थानों पर यह पाया है कि जिन भवनों में ईशान दिशा दूषित है, उन परिवारों की  संतान या तो बीमार है या पढ़ाई में बहुत कमजोर है ।कई घरों में तो ऐसा देखा गया है कि उस घर में कन्या संतान अधिक और पुत्र संतान का अभाव है ।अतः इस दिशा को कभी भी ब्लॉक नहीं करना चाहिए। इसे  कदापि  बन्द ना करें। यदि इस दिशा में दरवाजा नहीं हो सकता तो कम से कम 1-2 खिड़की अवश्य छोड़ें। वास्तु शास्त्र में ईशान दिशा का बढ़ना बहुत शुभ माना गया है जबकि अन्य दिशाओं का बढ़ना अशुभ होता है यदि यह दिशा कटी हुई है ,छोटी है तो यह सारे मकान का वास्तु खराब कर देती है ।इसलिए इस दिशा को समकोण रखें। इस दिशा का  बढ़ना शुभ होता है। लक्ष्मी प्रसन्न रहती है, धन का आवागमन लगातार बढ़ता है ।यदि इस दिशा में कुछ दोष है तो इस दिशा में एक शीशा लगा सकते है ताकि दिशा वृद्धि का भ्रम हो ।इस दिशा में भारी समान तो भूलकर भी ना रखें क्योंकि यह दिशा वास्तु पुरुष का मस्तिष्क होता है मस्तिष्क से ही सारे शरीर का संचालन होता है जैसे पुत्र और धन से वंश और घर चलता है उसी प्रकार ईशान दिशा को पवित्र रखने से घर की वंश वृद्धि  होती है और समृद्धि बढ़ती है।
आचार्य शिव कुमार शर्मा,
 अध्यक्ष- शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद
Pt. Shiv Kumar Sharma

One Reply to “वास्तु है सबके लिए (भाग- 7)”

Your Email address will not be published.