वास्तु है सबके लिए( भाग 29)
*देशी फेंगशुई के अनोखे प्रयोग*
देशी फेंगशुई के इस क्रम में आज के कुछ प्रतीक जिनका महत्व एवं उपयोग इस प्रकार है!
*कमल का पुष्प*
कमल का पुष्प प्राचीन काल से ही पवित्रता का प्रतीक माना गया है! मां सरस्वती व मां लक्ष्मी का यह पवित्र आसन है! माँ सरस्वती व माँ लक्ष्मी श्वेत व रक्त कमल पर विराजमान होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं!
वास्तु शास्त्र में कमल का पुष्प समृद्धि व निर्मलता का चिह्न माना जाता है! मुख्य उत्सवों के अवसर पर व गृह प्रवेश के समय द्वार के दोनों ओर एवं प्रवेश द्वार के पास कमल पुष्प अंकित करना लक्ष्मी जी (समृद्धि) को निमन्त्रण देना माना जाता है!
*पीले पुष्प*
वास्तु शास्त्र में पीले पुष्पों का प्रयोग परिवार के सभी सदस्यों के मध्य परस्पर प्रेम, सहयोग, सामंजस्य एवं सम्बन्धों में मधुरता की वृद्धि के लिए घर के उत्तर पूर्व अर्थात् ईशान दिशा में गमले या चीनी मिट्टी के फूलदान में पीले रंग के पुष्प सजाने चाहिए!
जिस मेज या स्टूल पर फूलदान सजाएं, उस स्थान पर अन्य कोई वस्तु न रखें.
*श्वेत पुष्प*
जीवन में उन्नति की कामना करने वाले व्यक्ति को घर की उत्तर दिशा में सफेद रंग के कृत्रिम पुष्प लगाएं या सफेद पुष्पों के पौधे लगाएं.!
*लाल पुष्प*
गृह स्वामी के प्रभाव को उन्नत करने के लिए गृहस्थ जीवन में मधुरता के लिए घर के दक्षिण पश्चिम कोने में लाल या गुलाबी रंग के पुष्प सजाएं! या लाल गुलाब के पौधे लगाएं!
पुष्पों के उपरोक्त प्रयोगों के अलावा घर या आफिस के मुख्य द्वार पर कांच या चीनी मिट्टी के पात्रों में जल भरकर प्रतिदिन ताजे पुष्प रखें या कृत्रिम पुष्प सजाने सें धन समृद्धि का आकर्षण होता है.
*स्वास्तिक चिह्न*
वैदिक साहित्य एवं पौराणिक ग्रन्थों में स्वास्तिक का बहुत अधिक महत्व बताया गया है!
दायीं ओर को घुमाव लेते हुए स्वास्तिक चिह्न बहुत शुभ माना गया है.जबकि बायीं ओर घुमाव वाला स्वास्तिक चिह्न बहुत अशुभ होता है.
हिन्दू धर्म के सभी धार्मिक कार्यों में स्वास्तिक का किसी न किसी रूप में प्रयोग किया जाता है! स्वस्ति शब्द में ठक्(इक्) प्रत्यय लगने से स्वास्तिक हो जाता है! स्वस्ति का अर्थ है कल्याण, और स्वास्तिक का अर्थ है कल्याण करने वाला! स्वास्तिक का चिह्न पीले सिन्दूर से घर के द्वार पर बनाने से बुरी दृष्टि से रक्षा होती है!
यदि आपके घर में कुछ अशुभ हो रहा हो, नजर आदि से परेशान है तो मंगलवार को हनुमान जी की मूर्ति के चरणों का सिन्दूर लाकर द्वार के दोनों ओर 9*9 इंच का स्वास्तिक बना दें!
पं. शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु अध्यक्ष शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनसंधान केंद्र गाजियाबाद
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