सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगा होली का त्यौहार , होली पूजन और होली दहन के शुभ मुहूर्त

27Oct

*सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगा होली का त्यौहार* 
* *होली पूजन और होली दहन के शुभ मुहूर्त*
*होली पूजन के लिए मिलेंगे कुल 2 घंटे 39 मिनट*
इस वर्ष दिनांक 28 मार्च , रविवार को होली का पुण्य पर्व मनाया जाएगा।
रविवार को 5:35 बजे तक उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र है। रविवार को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र होने से मित्र योग(सर्वार्थ सिद्धि योग)  बनता है। मित्र योग में होलिका पूजन का विशेष महत्व है।
यद्यपि मित्र योग बहुत शुभ  होता है। किंतु इस वर्ष होलिका पूजन  का समय केवल 2 घंटा 39मिनट रहेगा।
दोपहर 1:51 तक भद्रा रहेगी और शाम को 4:30 बजे से 6:00 बजे तक राहुकाल होगा।
इसके बीच की अवधि 2 घंटे 39 मिनट में ही महिलाओं को होली पूजन करना चाहिए। अपनी संतान की कुशलता,लंबी आयु एवं उन्नति के लिए महिलाएं होली का विधिवत पूजन करती हैं। इसलिए शुभ मुहूर्त में ही होली पूजन करना श्रेयस्कर होगा। 
होलिका दहन का पौराणिक महत्व तो यह है की हिरण्यकश्यप के कहने पर प्रह्लाद की बुआ प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गई थी किंतु ईश्वर की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जलकर राख हो गई थी।
यदि देखा जाए तो   यह आख्यान ठीक नहीं है ।यदि ऐसा होता तो होलिका पूजन ही क्यों होता है। वास्तव में जब होलिका को उसके भाई ने आदेश दिया की प्रह्लाद को लेकर के अग्नि में बैठ जाए ,क्योंकि उसके पास एक ऐसा दिव्य वस्त्र था जिसको ओढ़ने  से अग्नि उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती थी।  राक्षस प्रवृत्ति होने कारण होलिका अपने भतीजे प्रहलाद को लेकर अग्नि में तो बैठ गई। किंतु ध्यान आया कि मैंने जीवन में आनेक पाप किए हैं । अब अंतिम समय में कुछ पुण्य कमा लूं  और उस दिव्य वस्त्र प्रह्लाद को ओढाकर उसकी अग्नि से रक्षा की और खुद चिता में भस्म हो गई ।तो उसी को आधार मानकर हमारी माताएं, बहने, महिलाएं  होलिका का पूजन करती हैं और अपने पुत्रों की दीर्घायु का वरदान मांगती हैं।
होलिका दहन का समय शाम 6:33 बजे से रात्रि 12:22 तक अच्छा मुहूर्त है।
होली का पर्व नवान्नेष्टि पर्व कहलाता है। इसका शाब्दिक अर्थ होता है (नव +अन्न + इष्टि) अर्थात नवीन अन्न के आगमन की इच्छा से मनाया हुआ उत्सव।
वास्तव में होली का पर्व के समय रबी की फसल पकनी आरंभ हो जाती हैं। कृषक समाज बड़ी प्रसन्नता से गेहूं की बालियों को होलिका दहन के समय अग्नि में भून कर घर लाते हैं और प्रसाद के रूप में अपने परिवार के सदस्यों को खिलाते हैं । ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से घर में अन्न और धन-धान्य की हमेशा वृद्धि होती रहती है।
पंडित शिवकुमार शर्मा, आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न।
अध्यक्ष-शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र ,गाजियाबाद

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