वास्तु है सबके लिए (भाग -13), अध्ययन कक्ष (study room) का वास्तु विश्लेषण

27Oct
वास्तु है सबके लिए ( भाग 13)
*अध्ययन कक्ष (Study room)का वास्तु विश्लेषण*
कक्षों की श्रृंखला में गृह स्वामी कक्ष, drawing room या बैठक कक्ष के पश्चात अध्ययन कक्ष भी बहुत महत्वपूर्ण है। अध्ययन कक्ष हमारी भविष्य की पीढ़ियों के लिए बहुत महत्व रखता है। अध्ययन सदैव उत्तर पूर्व कोने में अर्थात ईशान दिशा , पूर्व दिशा  अथवा उत्तर दिशा में शुभ माना गया है अध्ययन कक्ष हमारे बच्चों का ज्ञान का केंद्र है। वहां रहकर उसमें अध्ययन करने के लिए उनको अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है और उत्तर-पूर्व दिशाएं बच्चों के लिए बहुत ही ऊर्जावान साए हैं अध्ययन कक्ष में आंतरिक वास्तु के अनुसार कुछ महत्वपूर्ण दिशा निर्देश इस प्रकार हैं।
*प्राय देखा जाता है की अध्ययन कक्ष बालकों का शयन कक्ष भी होता है अतः उसके अनुरूप उस कक्ष की साज-सज्जा बहुत ही सावधानी से करनी चाहिए।
*अध्ययन कक्ष की दीवारों का पेंट हल्के और मन को आकर्षक लगने वाले होनी चाहिए इससे आपके बालक का ध्यान और मन एकाग्र रहे।
*अध्ययन कक्ष में उत्तर पूर्व की ओर पर्याप्त मात्रा में खिड़कियां अथवा रोशनदान होने चाहिए
*यदि अध्ययन कक्ष बालकों का बेडरूम भी है तो उसने दक्षिण और पश्चिम की दीवार की ओर बैड के स्थिति होनी चाहिए। जिसका सिराहना पूरब या दक्षिण में होना चाहिए ।
*उत्तर अथवा पूर्व की दीवार की ओर कुर्सी मेज रखें इस पर बैठ कर  आपका बालक अध्ययन कर सकें।
*पढ़ाई करते समय बालक का मुंह हमेशा उत्तर या पूर्व में हो।
*यह ध्यान रखें श्री बालक अपने बिस्तर पर बैठ कर ना पढे। बिस्तर पर बैठकर पढ़ने से मन में आलस्य की आदत बन जाती है। आराम से, लेट कर ,बैठ कर , झुककर आदि अनेक मुद्राओं में पढता है जिससे उसका मन एकाग्र नहीं हो पाता।
*पढ़ाई करते समय बालक की टेबल पर किताबें अस्त-व्यस्त ना रहे।यदि ऐसा होता है तो बालक का मन स्थिर नहीं रहता है। जिससे पढ़ाई में मन नहीं लगता है।
*यदि आपके मकान में पूजा घर का स्थान नहीं मिल पा रहा है तो अध्ययन कक्ष में भी पूजा घर बनाया जा सकता है।
*आजकल कंप्यूटर मोबाइल का जमाना है। अब कोई छात्र इन उपकरणों से वंचित नहीं है। कोरोना काल में तो छात्रों के लिए कंप्यूटर व मोबाइल एक संजीवनी बन गया है। हमें ध्यान रखना है की कंप्यूटर के तार अस्त-व्यस्त ना फैले हो,मोबाइल के चार्जर  कानों के लीड,केबल्स आदि अस्त व्यस्त ना हो। इनको सदैव व्यवस्थित रूप में रखें। क्योंकि अस्तव्यस्त फैले हुए तारों से घर में नकारात्मक ऊर्जा आ जाती है।
*यदि आपके बालक का ध्यान पढ़ाई में कम लगता है। मन एकाग्र नहीं हो पाता है तो कुछ छोटे-छोटे उपाय करें।
*पढ़ने की मेज पर दाहिने हाथ की ओर क्रिस्टल बॉल , एजुकेशन टावर क्रिस्टल ग्लोब की स्थापना करें।
*कांच की कटोरी में 11 या 21गोमती चक्र रख कर मेज पर रखें ।
*11 पीली कौडियां पीले कपड़े में बांधकर मेज के ऊपर दाहिने हाथ की और लटका दें।
*अध्ययन कक्ष को कभी भी स्टोर रूम न बनाएं। मैंने कई  स्थान पर देखा है कि बच्चों के कमरे में घर की अन्य अनावश्यक वस्तुएं रख देते है। ऐसा करने से उस कक्ष की ऊर्जा का संतुलन बिगड़ जाता है। बच्चा अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं कर पाता है।
*कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों को यह ध्यान रखना चाहिए अपनी सब पुस्तकें पश्चिमी अथवा दक्षिणी दीवार की अलमारी में रखें।
*जो विषय हमें पढ़ना है उसी विषय की पुस्तक आदि पढ़ने की मेज पर रखें ।बाकी सब पुस्तकें अलग रखें ।
*अध्ययन कक्ष में प्रातः काल पूजा के बाद धूपबत्ती ,कपूर या मोमबत्ती थोड़ी देर के लिए जला दें। ऐसा करने से वहां की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होकर अपेक्षित परिणाम मिलेंगे।
Pt. Shiv Kumar Sharma

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