*वास्तु है सबके लिए (भाग 5 ,)*
पश्चिम दिशा का महत्व:
Importance of west direction.
वास्तु के सिद्धांत के अनुसार पश्चिम दिशा का विस्तार 247.5 अंशों से 292.5अंशों तक है।
इस दिशा के स्वामी शनि हैं। पश्चिम दिशा का आधिपत्य वरुण देव के पास है । वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिशा में भारी सामान, सीढ़ियां,स्टोर , शौचालय,
अलमारी,अनाज का भण्डारण (टंकी) आदि रखनी चाहिए।
पश्चिम दिशा से बांयी ओर नैऋत्य में गृह स्वामी का मुख्य कक्ष होना चाहिए,दांयी ओर वायव्य में विवाह योग्य कन्या का कक्ष, अतिथि कक्ष,रोगी व्यक्ति का कक्ष बनाना शुभ रहता है
पश्चिम मध्य भाग में बड़े विवाहित
पुत्र का कक्ष अच्छा रहता है।
जिन व्यक्तियों का जन्म तिथि 8, 17,26 अर्थात् 8मूलांक या भाग्यांक होता है,या जन्म कुंडली में शनि शुभ है तो पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार श्रेष्ठ होता है,ध्यान रहें कि पश्चिम दक्षिण के कोने में मुख्य दरवाजा न बनाएं।
कारखाने में भारी निर्माण, मशीनरी इस दिशा में रखना उत्तम है। घर का ढलान सदैव पश्चिम दिशा से पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। डायरेक्टर/चेयरमैन का कक्ष इसी दिशा में होना अच्छा है।
पं.शिवकुमार शर्मा,
अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केन्द्र गाजियाबाद
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