25 नवंबर को है देवोत्थान एकादशी ,आरंभ होंगे विवाह के मुहूर्त

27Oct
*25 नवंबर को है देवोत्थान  एकादशी , आरंभ होंगे विवाह मुहूर्त*
( इस बार कम हैं विवाह मुहूर्त )।
(इसके पश्चात 4 महीने करनी पड़ेगी प्रतीक्षा)
शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र, गाजियाबाद
इस बार पहले तो कोरोनावायरस के कारण युवा विवाह नहीं कर पाए।अब देवोत्थान एकादशी से चातुर्मास समाप्त होकर विवाह मुहूर्त तो आरंभ हो गए हैं किन्तु नवंबर दिसंबर में विवाह के कुल नौ मुहूर्त हैं।
25 नवंबर 2020 देवोत्थान एकादशी -अनबूझ शाहा(विवाह मुहूर्त)
27 ,30 नवंबर ।
1,6,7,9 ,10 और 11 दिसंबर तक कुल नौ विवाह मुहूर्त है।
इनमें भी सबसे बड़े विवाह मुहूर्त 30 नवंबर ,एक और सात दिसंबर है। इन शुभ विवाह मुहूर्तों में ही  नगर में हजारों शादियां होंगी।
25 नवंबर को देवोत्थान एकादशी अनबूझ शाहा होता है। इस तिथि को सभी लोग शुभ मानते  हैं। इसलिए यह विवाह मुहूर्त बहुत ही व्यस्त रहने वाला है।
इसके अलावा एकादशी  का व्रत रखने वाले भक्तगण देवोत्थान एकादशी पर ही एकादशी व्रत का पारायण करते हैं। तुलसी विवाह आदि का भी आयोजन इस अवसर पर होता  हैं ।इस प्रकार यह तिथि बहुत ही श्रेष्ठ मानी गई है।
इन उत्तम मुहूर्तों के बाद साढे  चार महीने तक विवाह के मुहूर्त नहीं है। इसलिए जो युवा इस वर्ष रह  जाएंगे, अब उनका विवाह   25 अप्रैल से और 18 जुलाई  के मध्य हो सकेगा । और सऊदी में विवाह के  38 मुहूर्त हैं।
 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक धनु राशि में सूर्य का संचार रहेगा इसे हम मलमास या पौष मास कहते हैं। तथा 14 मार्च से 13 अप्रैल तक सूर्य मीन राशि में रहेंगे, तब भी वही मलमास रहेगा। ऐसा माना जाता है कि जब भी सूर्य बृहस्पति की धनु और मीन राशि में आता है। उस अवधि में विवाह मुहूर्त आदि शुभ कार्य नहीं होते हैं।
इसी प्रकार जब बृहस्पति भी डेढ़ वर्ष के लिए सिंह राशि में आते हैं तो पूरा वर्ष भी शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है । किन्तु कुछ विद्वान उस पूरी अवधि में भी कुछ शुभ मुहूर्त निकाल लेते हैं ताकि लोग असुविधा से बच सकें। ऐसे में गुरु के नवांश अवधि को अत्यंत अशुभ मानकर  छोड देते हैं। बाकी समय विवाह आदि के लिए शुभ मान लेते हैं।क्योंकि वह डेढ़ वर्ष का लंबा समय होता है, इसलिए शास्त्रों में इसका विकल्प दिया हुआ है। किंतु सूर्य की सक्रांति तो एक महीने की होती है। इसलिए इसमें शुभ समय के लिए में कोई विकल्प नहीं होता है।
उपरोक्त साढ़े 4 महीने की अवधि में 2 मास तो मलमास के बीत गए। 17 जनवरी 2021 से 15 फरवरी 2021 तक गुरु अस्त रहेंगे।
13 फरवरी 2021 से 18 अप्रैल 2021 तक शुक्र अस्त रहेंगे।
शुक्र और बृहस्पति होने की अवधि में विवाह मुहूर्त शुभ  नहीं होते है।
कन्या के वैवाहिक जीवन की सफलता के लिए बृहस्पति का शुभ होना अच्छा है और लड़के की वैवाहिक जीवन की सफलता के लिए शुक्र ग्रह का शुभ होना अच्छा है। इसलिए शुक्र और गुरु अस्त होने कारण शास्त्रों में इनका परित्याग बताया गया है।
आगे 25 अप्रैल से विवाह के बहुत मुहूर्त हैं उस समय आप को काफी राहत मिलेगी।
कुछ लोग 16 फरवरी अर्थात बसंत पंचमी को अनबूझ शाहा जानकर विवाह की तिथि तय कर रहे हैं। लेकिन जब शुक्र और गुरु अस्त हैं तो चाहे अनसूझ शाहा  हो अथवा सुझवाया हुआ। दोनों प्रकार से ही त्याग करना चाहिए।
पंडित ,शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवम् ज्योतिष रत्न।
अध्यक्ष- शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद

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